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Success Story: 'पत्‍थर पर उगाए फूल' तो 3D प्रिंटिंग से बना दिया सपनों का घर…

आज के दौर में युवा सिर्फ पारंपरिक नौकरी तक सीमित नहीं रहना चाहते. कई युवा ऐसी समस्याओं को पहचान रहे हैं, जिनका सामना समाज और उद्योग लंबे समय से कर रहे हैं और तकनीक की मदद से उनका समाधान तलाश रहे हैं. हाल ही में आयोजित NDTV युवा 2026 के मंच पर ऐसी ही दो कहानियां सामने आईं.

इस मंच पर युवा उद्यमी डॉ. अंकिता सिन्हा

इस मंच पर युवा उद्यमी डॉ. अंकिता सिन्हा और दीपक रेड्डी ने बताया कि कैसे उन्होंने अपने आसपास की समस्याओं को समझा, जोखिम लिया और उनके समाधान को अपना स्टार्टअप बना दिया. 3D प्रिंटिंग से कंस्ट्रक्शन में बदलाव की कोशिश

डॉ अंकिता सिन्हा माइकोबा (MyqoBa) की को-फाउंडर और

डॉ अंकिता सिन्हा माइकोबा (MyqoBa) की को-फाउंडर और CMO हैं. आईआईटी से पीएचडी कर रहीं अंकिता ने पारंपरिक मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर से अलग हटकर 3D कंक्रीट प्रिंटिंग के क्षेत्र में काम करने का फैसला किया. उनका स्टार्टअप कंस्ट्रक्शन को ऑटोमेट करने की दिशा में काम कर रहा है.

अंकिता के मुताबिक, पारंपरिक कंस्ट्रक्शन इंडस्ट्री काफी बिखरी

अंकिता के मुताबिक, पारंपरिक कंस्ट्रक्शन इंडस्ट्री काफी बिखरी हुई और गैर-व्यवस्थित है. इसमें क्वालिटी, लागत और समयसीमा से जुड़ी चुनौतियां सामने आती हैं. 3D कंक्रीट प्रिंटिंग के जरिए मकानों और इमारतों का निर्माण तेजी से करने और लागत पर बेहतर नियंत्रण की कोशिश की जा रही है.

शुरुआत में इस तकनीक पर लोगों का भरोसा

शुरुआत में इस तकनीक पर लोगों का भरोसा जीतना आसान नहीं था. लेकिन भारत सरकार, गुजरात सरकार और इनक्यूबेटर्स से मिली मदद के बाद स्टार्टअप ने अपनी यात्रा आगे बढ़ाई. आज माइकोबा देशभर में 650 से ज्यादा स्ट्रक्चर्स का निर्माण कर चुका है. किसान परिवार की समस्या बनी स्टार्टअप का आइडिया

दीपक रेड्डी की कहानी खेती से जुड़ी एक

दीपक रेड्डी की कहानी खेती से जुड़ी एक पीढ़ियों पुरानी समस्या से शुरू होती है. किसान परिवार से आने वाले दीपक पेशे से मैकेनिकल इंजीनियर हैं. उन्होंने अपनी स्थिर कॉर्पोरेट नौकरी छोड़कर खेती की समस्या का समाधान खोजने का फैसला किया. जब वो अपने गृह नगर लौटे तो उन्होंने देखा कि पानी और उपजाऊ मिट्टी होने के बावजूद उनके खेत का एक हिस्सा बंजर पड़ा था.

पिता से पूछने पर पता चला कि दादाजी

पिता से पूछने पर पता चला कि दादाजी के समय से ही जमीन पर छोटे और मध्यम आकार के पत्थर होने के कारण वहां खेती नहीं हो पा रही थी. दीपक ने महसूस किया कि ये सिर्फ उनके परिवार की समस्या नहीं है. देश के कई किसान ऐसी ही दिक्कतों का सामना करते हैं.

इसके बाद उन्होंने भौम्या इनोवेशंस की शुरुआत की

इसके बाद उन्होंने भौम्या इनोवेशंस की शुरुआत की. इसका मकसद मैनुअल लेबर की जगह किफायती और इनोवेटिव मशीनों का इस्तेमाल करके खेती को आसान और लाभदायक बनाना है. 5 महीने में 12 लाख रुपये का राजस्व दीपक के स्टार्टअप की स्टोन-क्लीयरिंग मशीन का इस्तेमाल करने वाली आंध्र प्रदेश की एक महिला किसान का उदाहरण भी सामने आया. उन्होंने मशीन खरीदकर रेंटल सर्विस शुरू की और सिर्फ पांच महीने में 12 लाख रुपये का राजस्व अर्जित किया.

ऐसे उदाहरण दिखाते हैं कि कृषि में इस्तेमाल

ऐसे उदाहरण दिखाते हैं कि कृषि में इस्तेमाल होने वाली तकनीक सिर्फ खेती की समस्या हल करने तक सीमित नहीं है, बल्कि रोजगार और कमाई के नए मौके भी बना सकती है. 26 हजार से ज्यादा आवेदनों में मिली पहचान अंकिता और दीपक दोनों के लिए अदाणी ग्रुप और NDTV के 'वंदे भारतम' प्लेटफॉर्म पर चुना जाना उनकी यात्रा का अहम पड़ाव रहा.

26,000 से ज्यादा आवेदनों में से माइकोबा और

26,000 से ज्यादा आवेदनों में से माइकोबा और भौम्या इनोवेशंस का शीर्ष स्टार्टअप्स में चुना जाना उनके काम को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिलने जैसा था. दोनों के मुताबिक, इस पहचान के बाद परिवार, समाज और उद्योग जगत का भरोसा भी उनके काम पर मजबूत हुआ. युवाओं के लिए क्या है संदेश? कार्यक्रम में दोनों उद्यमियों ने युवाओं को करियर और उद्यमिता को लेकर अपनी सोच साझा की.

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आज के दौर में युवा सिर्फ पारंपरिक नौकरी तक सीमित नहीं रहना चाहते.

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Source: NDTV India
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