[{"data":1,"prerenderedAt":-1},["ShallowReactive",2],{"$f2t5gwo9ssnmyk":3},{"_id":4,"slug":5,"title":6,"subtitle":7,"kind":8,"cards":9,"tags":53,"categories":55,"source":57,"lang":60,"author":61,"audioState":64,"stats":65,"publishedAt":68,"renderer":69},"6abb62d2ca21c797c7e9c928","post-4af2a688","क्या भारत भविष्य के 'ड्रोन युद्ध' के लिए तैयार है, एक्सपर्ट्स ने बताया","'इंडिया टुडे कॉन्क्लेव साउथ 2026' में भारत की रक्षा आत्मनिर्भरता पर देश के शीर्ष विशेषज्ञों ने मंथन किया। सत्र के दौरान DRDO वैज्ञानिक डॉ.","news",[10,13,18,23,28,33,38,43,48],{"headline":6,"body":11,"imageUrl":12,"sourceImageUrl":12},"'इंडिया टुडे कॉन्क्लेव साउथ 2026' में भारत की रक्षा आत्मनिर्भरता पर देश के शीर्ष विशेषज्ञों ने मंथन किया। सत्र के दौरान DRDO वैज्ञानिक डॉ. डी. शेशगिरि ने बताया कि भारत का स्वदेशी रडार इजराइली प्रणालियों से भी बेहतर है और इसने हिमालय की ऊंचाइयों पर चीनी विमानों को ट्रैक किया है. (अपडेटेड 29 सितंबर 2026, 11:49 AM IST)","https:\u002F\u002Fakm-img-a-in.tosshub.com\u002Faajtak\u002Fimages\u002Fstory\u002F202609\u002F6abb57f930bd4-india-today-conclave-south-2026-291727755-16x9.jpeg",{"headline":14,"body":15,"imageUrl":16,"images":17},"'इंडिया टुडे कॉन्क्लेव साउथ 2026' के 'आत्मनिर्भर इन","'इंडिया टुडे कॉन्क्लेव साउथ 2026' के 'आत्मनिर्भर इन एक्शन: हाउ द साउथ इज बिल्डिंग इंडियाज सेल्फ-रिलायंस इन डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग' सत्र में भारत की रक्षा आत्मनिर्भरता और तकनीकी सामर्थ्य पर गहन मंथन हुआ. DRDO के नेवल फिजिकल एंड ओशनोग्राफिक लेबोरेटरी (NPOL) के निदेशक और वैज्ञानिक डॉ. डी शेशगिरि ने भारत के स्वदेशी रडार और रक्षा प्रौद्योगिकियों की मजबूती पर प्रमुखता से विचार रखे.","\u002Fapi\u002Fmedia\u002Fposts\u002Fpost-4af2a688\u002F1.webp",{"local":16},{"headline":19,"body":20,"imageUrl":21,"images":22},"डॉ. डी. शेशगिरि ने बताया कि भारत द्वारा","डॉ. डी. शेशगिरि ने बताया कि भारत द्वारा विकसित स्वदेशी 'एयरबोर्न अर्ली वार्निंग एंड कंट्रोल' (AEW&C) रडार प्रणाली विदेशी इजरायली 'फाल्कन' (Falcon) प्रणाली की तुलना में कहीं अधिक उन्नत और प्रभावी साबित हुई है. उन्होंने याद करते हुए बताया कि जब AEW&C के दूसरे संस्करण के डिजाइन और फ्रीक्वेंसी पर चर्चा चल रही थी, तब वायु सेना के शीर्ष अधिकारियों और समिति की समीक्षा के बाद यह निष्कर्ष निकला कि भारतीय वैज्ञानिकों द्वारा बनाई गई रडार प्रणाली प्रदर्शन के मामले में आयातित इजरायली रडार से कहीं आगे है.","\u002Fapi\u002Fmedia\u002Fposts\u002Fpost-4af2a688\u002F2.webp",{"local":21},{"headline":24,"body":25,"imageUrl":26,"images":27},"भारतीय रडार प्रौद्योगिकियों की श्रेष्ठता का कारण बताते","भारतीय रडार प्रौद्योगिकियों की श्रेष्ठता का कारण बताते हुए डॉ. शेशगिरि ने कहा कि भारत की भौगोलिक विविधता ही हमारी सबसे बड़ी ताकत है, उन्होंने कहा- \"हमारे पर्यावरण और परिस्थितियों को हमसे बेहतर कोई नहीं जान सकता. भारत के पास एक तरफ 6 किलोमीटर की औसत ऊंचाई वाले हिमालय के विषम इलाके हैं, तो दूसरी तरफ राजस्थान का भीषण तापमान और चारों ओर फैला विशाल समुद्री क्षेत्र, विदेशी रडार अक्सर हिमालय की अत्यधिक ऊंचाइयों पर विफल हो जाते हैं क्योंकि वे उस माहौल के लिए डिजाइन नहीं होते.","\u002Fapi\u002Fmedia\u002Fposts\u002Fpost-4af2a688\u002F3.webp",{"local":26},{"headline":29,"body":30,"imageUrl":31,"images":32},"उन्होंने खुलासा किया कि परीक्षणों के दौरान स्वदेशी","उन्होंने खुलासा किया कि परीक्षणों के दौरान स्वदेशी रडार प्रणाली ने अपनी तय क्षमता से कहीं आगे जाकर 250 किलोमीटर से अधिक की दूरी पर चीनी विमानों को सफलतापूर्वक ट्रैक किया था. दक्षिण भारत की तकनीकी और ऐतिहासिक पृष्ठभूमि पर प्रकाश डालते हुए डॉ. शेशगिरि ने कहा कि आदि शंकराचार्य के समय से ही 'द्रविड़' शब्द किसी एक राज्य या क्षेत्र तक सीमित न होकर तीनों समुद्रों से घिरे विशाल तटीय भूभाग का प्रतीक रहा है. दक्षिण भारत शुरू से ही रक्षा, अंतरिक्ष और वैज्ञानिक नवाचारों का सबसे बड़ा केंद्र रहा है, जो आज भारत को रक्षा उत्पादन में आत्मनिर्भर बनाने का नेतृत्व कर रहा है.","\u002Fapi\u002Fmedia\u002Fposts\u002Fpost-4af2a688\u002F4.webp",{"local":31},{"headline":34,"body":35,"imageUrl":36,"images":37},"डॉ. वी.के. आनंदन ने भारत की रक्षा और","डॉ. वी.के. आनंदन ने भारत की रक्षा और अंतरिक्ष आत्मनिर्भरता पर बात करते हुए कहा कि हम भले ही स्वदेशी रडार और सैटेलाइट बनाने में सक्षम हो चुके हैं, लेकिन इनके अंदर लगने वाली सेमीकंडक्टर चिप्स और प्रोसेसर के लिए आज भी हमें बड़े पैमाने पर विदेशों पर निर्भर रहना पड़ता है. इस निर्भरता के कारण विदेशी नीतियों और पाबंदियों के दौरान हमारे लिए जरूरी उपकरण हासिल करना बेहद चुनौतीपूर्ण हो जाता है, उन्होंने जोर देकर कहा कि भले ही हम हर छोटा-मोटा कलपुर्जा खुद न बनाएं, लेकिन पूरी तकनीक का डिजाइन और उसका मालिकाना हक भारत के अपने नियंत्रण में होना बेहद जरूरी है, ताकि परिचालन और सुरक्षा के स्तर पर देश पर कोई संकट न आए.","\u002Fapi\u002Fmedia\u002Fposts\u002Fpost-4af2a688\u002F5.webp",{"local":36},{"headline":39,"body":40,"imageUrl":41,"images":42},"भारत के रक्षा निर्माण की प्रगति को रेखांकित","भारत के रक्षा निर्माण की प्रगति को रेखांकित करते हुए उन्होंने बताया कि बीते 10 वर्षों में देश का रक्षा उत्पादन 40,000 करोड़ रुपये से बढ़कर लगभग 1.78 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया है, जिसे आने वाले समय में 2.8 लाख करोड़ रुपये तक ले जाने का लक्ष्य रखा गया है. उन्होंने स्पष्ट किया कि इस महत्वाकांक्षी लक्ष्य का लगभग 90 प्रतिशत उत्पादन देश के भीतर ही होना है, और यह काम केवल सरकारी आरएंडडी संस्थानों व पीएसयू (PSUs) के भरोसे संभव नहीं है. इसके लिए देश के निजी उद्योगों को भी बड़े पैमाने पर अपनी भागीदारी बढ़ानी होगी.","\u002Fapi\u002Fmedia\u002Fposts\u002Fpost-4af2a688\u002F6.webp",{"local":41},{"headline":44,"body":45,"imageUrl":46,"images":47},"पूर्व फाइटर पायलट और न्यूस्पेस रिसर्च एंड टेक्नोलॉजीज","पूर्व फाइटर पायलट और न्यूस्पेस रिसर्च एंड टेक्नोलॉजीज के सीईओ समीर जोशी ने भविष्य के युद्धों में ड्रोन और स्वायत्त प्रणालियों (Autonomous Systems) की निर्णायक भूमिका पर जोर दिया, उन्होंने कहा कि सीमा पार से आने वाले ड्रोन केवल एक शुरुआती चेतावनी हैं और आने वाले युद्धों में यह खतरा 10 गुना तक बढ़ जाएगा. यूक्रेन युद्ध का उदाहरण देते हुए उन्होंने बताया कि आज युद्धक्षेत्र में 95 प्रतिशत निशाने केवल ड्रोन के जरिए साधे जा रहे हैं. आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और सॉफ्टवेयर के चलते अब लक्ष्यों को निशाना बनाने की प्रक्रिया घंटों से घटकर महज कुछ मिनटों में सिमट गई है.","\u002Fapi\u002Fmedia\u002Fposts\u002Fpost-4af2a688\u002F7.webp",{"local":46},{"headline":49,"body":50,"imageUrl":51,"images":52},"उन्होंने आगे कहा कि ड्रोन और मानवरहित प्रणालियां","उन्होंने आगे कहा कि ड्रोन और मानवरहित प्रणालियां बहुत कम लागत में युद्ध के मैदान पर बहुत बड़ा प्रभाव डालती हैं. ऐसे में भारत के पास डीप-टेक और एआई जैसी आधुनिक तकनीकों में बढ़त बनाने का बहुत अच्छा मौका है. यदि भारत समझदारी से काम ले और इन उन्नत तकनीकों को तेजी से अपनाए, तो न केवल हम दुनिया से कदम से कदम मिला पाएंगे, बल्कि अपने पारंपरिक सैन्य प्लेटफॉर्मों को भी 'ड्रोन किल ज़ोन' में अधिक सुरक्षित, टिकाऊ और असरदार बना सकेंगे. सबसे तेज़ ख़बरों के लिए आजतक ऐप","\u002Fapi\u002Fmedia\u002Fposts\u002Fpost-4af2a688\u002F8.webp",{"local":51},[54],"asia",[56],"World & Politics",{"name":58,"url":59},"Aaj Tak","https:\u002F\u002Fwww.aajtak.in\u002Findia\u002Fnews\u002Fstory\u002Fis-india-ready-for-future-drone-warfare-experts-opinion-ntcpsc-dskc-2656094-2026-09-29?utm_source=rssfeed","hi",{"handle":62,"displayName":63},"spots","Spots",null,{"views":66,"likes":67,"saves":67,"shares":67,"completions":67,"opens":67,"skips":67,"depthSum":67},3,0,"2026-09-29T07:03:46.140Z","local"]