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PAK के स्पेस मिशन को चीन का सपोर्ट, बीजिंग में हो रही दो पायलटों की ट्रेनिंग, जाएंगे अंतरिक्ष!

अपनी हर जरूरतों के लिए चीन पर आश्रित पाकिस्तान ने स्पेस मिशन के लिए भी चीन का सहारा लिया है. चीन दो पाकिस्तानी पायलटों को अंतरिक्ष यात्रा के लिए ट्रेनिंग दे रहा है. इनमें से एक पायलट को पाकिस्तान का पहला अंतरिक्ष यात्री और तियानगोंग का पहला विदेशी यात्री बनने का मौका मिलेगा. (अपडेटेड 29 सितंबर 2026, 4:56 PM IST)

दो पाकिस्तानी पायलट बीजिंग में गहन प्रशिक्षण ले

दो पाकिस्तानी पायलट बीजिंग में गहन प्रशिक्षण ले रहे हैं, क्योंकि चीन अपने तियांगोंग स्पेस स्टेशन पर पहला विदेशी अंतरिक्ष यात्री भेजने की तैयारी कर रहा है. यह दोनों देशों के बीच अंतरिक्ष सहयोग के एक नए चरण की शुरुआत है.

ज़ीशान अली और खुर्रम दाऊद नाम के ये

ज़ीशान अली और खुर्रम दाऊद नाम के ये पायलट मैंडरिन भाषा सीख रहे हैं, सेंट्रीफ्यूज के अंदर तेज़ गुरुत्वाकर्षण बल का अनुभव कर रहे हैं और भारहीनता की स्थिति में खाने, सोने और उपकरणों की मरम्मत करने का अभ्यास कर रहे हैं, क्योंकि वे अंतरिक्ष की एक ऐतिहासिक यात्रा की तैयारी कर रहे हैं. कुछ ही दिनों में ये तय होगा कि इनमें से किस पायलट को अंतरिक्ष में जाने का मौका मिलेगा.

पाकिस्तान की स्पेस एजेंसी 'सुपारको' (Suparco) में मानव

पाकिस्तान की स्पेस एजेंसी 'सुपारको' (Suparco) में मानव अंतरिक्ष उड़ान सहयोग का काम देखने वाले आमेर गिलानी ने समाचार एजेंसी रॉयटर्स को बताया कि दोनों में से कौन उड़ान भरेगा, इस पर अंतिम निर्णय अक्टूबर के मध्य या अंत तक होने की उम्मीद है. इस मिशन की योजना चीन और पाकिस्तान ने 2019 में बनाई थी.

चुना गया पायलट पाकिस्तान का पहला अंतरिक्ष यात्री

चुना गया पायलट पाकिस्तान का पहला अंतरिक्ष यात्री बनेगा और चीन के तियांगोंग स्पेस स्टेशन की यात्रा करने वाला पहला विदेशी नागरिक बनेगा. चीन ने लॉन्च की तारीख की घोषणा नहीं की है.

आमेर गिलानी ने बताया कि ट्रेनिंग में चीनी

आमेर गिलानी ने बताया कि ट्रेनिंग में चीनी भाषा की गहन शिक्षा, स्पेसक्राफ्ट सिस्टम को समझना और ऑर्बिट की माइक्रोग्रैविटी और लिफ्ट-ऑफ के दौरान लगने वाले G-फोर्स के हिसाब से खुद को ढालना शामिल है.

इन दोनों लोगों ने लगभग 20 फाइनलिस्ट को

इन दोनों लोगों ने लगभग 20 फाइनलिस्ट को पीछे छोड़ा. ये फाइनलिस्ट पाकिस्तान के पायलटों और वैज्ञानिकों के शुरुआती ग्रुप से चुने गए थे और उन्हें मेडिकल फिटनेस, मानसिक मजबूती और SUPARCO के आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस डायरेक्टर उज़ैर अंसारी के अनुसार G-फोर्स सहने की क्षमता के आधार पर परखा गया था, जो बहुत कम वैज्ञानिकों में होती है.

उन्होंने कहा, "आपको ऐसे वैज्ञानिक आसानी से नहीं

उन्होंने कहा, "आपको ऐसे वैज्ञानिक आसानी से नहीं मिलेंगे जिन्हें यात्रा करने और हाई-लेवल G-फोर्स का सामना करने का अनुभव हो." उन्होंने बताया कि इसीलिए तेज़ रफ़्तार से उड़ान भरने का अनुभव रखने वाले इन दो लोगों को चुना गया. SUPARCO की ओर से इस मिशन पर विदेशी मीडिया को दी गई ये पहली जानकारी है.

G-फोर्स वह बल या त्वरण है जो गुरुत्वाकर्षण

G-फोर्स वह बल या त्वरण है जो गुरुत्वाकर्षण या गति में बदलाव के कारण शरीर/वस्तु पर लगता है. 1G पृथ्वी का सामान्य गुरुत्वाकर्षण बल है जिसे हम रोज महसूस करते हैं.

जब कोई गाड़ी, रोलर कोस्टर, विमान या रॉकेट

जब कोई गाड़ी, रोलर कोस्टर, विमान या रॉकेट तेजी से गति बढ़ाता/घटाता या मुड़ता है, तो अतिरिक्त बल लगता है जिसे G-फोर्स कहते हैं. 5G या उससे ज्यादा पर मनुष्य को बेहोशी हो सकती है.

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Source: Aaj Tak
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