Spots

'दवा कीमतों में 10 गुना बढ़ोतरी क्यों?

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि दवाओं की कीमतों में 10 गुना बढ़ोतरी क्यों? इतना सारा पैसा कहां जाता है? इससे किसे फ़ायदा हो रहा है? जस्टिस मेहता ने सॉलिसिटर जनरल से यह भी कहा कि अगर कोई ऐसा फ़ार्मासिस्ट मिल जाए जो बहुत दयालु हो और जरूरतमंद को 2,700 रुपये में दवा देने को तैयार हो, तो मरीज़ सोचने लगेगा कि दवा असली है या नकली. (अपडेटेड 29 सितंबर 2026, 10:47 PM IST)

सुप्रीम कोर्ट ने अस्पतालों द्वारा कैंसर की दवाओं

सुप्रीम कोर्ट ने अस्पतालों द्वारा कैंसर की दवाओं की कीमत 10 गुना तक बढ़ाए जाने पर गहरी चिंता जताते हुए इसे "कत्लेआम" (carnage) करार दिया और सभी दवाओं पर एक समान 16% मार्जिन की वकालत की. मंगलवार को जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की बेंच ने केंद्र सरकार से कहा कि वह अस्पतालों द्वारा मरीजों को अपने ही केमिस्ट से दवाएं खरीदने के लिए मजबूर करने के मामले पर गौर करे. कोर्ट ने कहा कि इस व्यवस्था का खामियाजा आम आदमी को भुगतना पड़ता है.

"यह कत्लेआम है. बिल्कुल साफ बात है. कैंसर

"यह कत्लेआम है. बिल्कुल साफ बात है. कैंसर की दवा रिटेलर्स को 2700 रुपये में सप्लाई की जाती है, लेकिन उसकी MRP 27000 रुपये रखी जाती है.

"कॉर्पोरेट अस्पताल किसी को नहीं बख्शते. वे तो

"कॉर्पोरेट अस्पताल किसी को नहीं बख्शते. वे तो शव तक को बाहर नहीं ले जाने देते. फार्मा सेक्टर को इससे कोई फर्क नहीं पड़ता." सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने केंद्र सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता से कहा.

सुप्रीम कोर्ट ड्रग्स (प्राइसेस कंट्रोल) ऑर्डर (DPCO), 2013

सुप्रीम कोर्ट ड्रग्स (प्राइसेस कंट्रोल) ऑर्डर (DPCO), 2013 के तहत दवाओं की कीमतों के रेगुलेशन, जेनेरिक दवाओं के प्रिस्क्रिप्शन और मेडिकल डिवाइस पर नियंत्रण से जुड़ी याचिकाओं पर सुनवाई कर रही था. रिटेलर ने 2700 में खरीदा और 27000 में बेचा शुरुआत में ही जस्टिस मेहता ने कहा कि उन्हें इसका कोई समाधान निकालना होगा और कुछ संतुलन बनाना होगा.

जस्टिस मेहता ने कहा, "यह अंतर क्यों? जरूरी

जस्टिस मेहता ने कहा, "यह अंतर क्यों? जरूरी या गैर-जरूरी होने से क्या फर्क पड़ता है? क्यों न हर चीज की MRP पर 16 प्रतिशत का मार्जिन रखा जाए?"

"सोचिए क्या होता है. आखिरकार इसका नतीजा यह

"सोचिए क्या होता है. आखिरकार इसका नतीजा यह होता है कि टैक्स देने वालों को नुकसान उठाना पड़ता है. कॉर्पोरेट अस्पतालों में कैंसर की एक जरूरी दवा की MRP 27,000 रुपये थी, जबकि रिटेलर के लिए इसकी कीमत 2700 रुपये थी. जरा अंतर तो देखिए."

सॉलिसिटर जनरल ने कहा कि उन्हें इस मामले

सॉलिसिटर जनरल ने कहा कि उन्हें इस मामले पर अधिकारियों के साथ चर्चा करने की जरूरत है और वे इस बात से सहमत थे कि इस मुद्दे पर ध्यान देने की ज़रूरत है. सबके लिए एक जैसे नियम क्यों नहीं

जस्टिस मेहता ने आगे कहा कि सरकार को

जस्टिस मेहता ने आगे कहा कि सरकार को इस बात पर भी ध्यान देना चाहिए कि कई कॉर्पोरेट अस्पताल यह जरूरी कर देते हैं कि दवाइयां उन्हीं के केमिस्ट या किसी खास फ़ार्मेसी से खरीदी जाएं, और अगर मरीज़ उन्हें बाहर से खरीदता है, तो वे इलाज की गारंटी नहीं देते.

"अगर कोई मरीज सरकारी स्कीम के तहत इलाज

"अगर कोई मरीज सरकारी स्कीम के तहत इलाज करवा रहा है, तो उसका खर्च कौन उठाता है? टैक्स देने वाला. तो फिर सबके लिए एक जैसे नियम क्यों नहीं?" 16 परसेंट मार्जिन क्यों नहीं

News

'दवा कीमतों में 10 गुना बढ़ोतरी क्यों? ये कत्लेआम है...', अस्पतालों की मुनाफाखोरी पर SC की कड़ी फटकार

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि दवाओं की कीमतों में 10 गुना बढ़ोतरी क्यों?

@spots #asia
Source: Aaj Tak
See more like this