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भारतीय शेयर बाज़ार में जारी गिरावट की चार बड़ी वजहें, कैसी होगी आगे की राह -…

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भारतीय शेयर बाज़ार में गिरावट का दौर थम

भारतीय शेयर बाज़ार में गिरावट का दौर थम नहीं रहा है. निफ़्टी 50 सोमवार को क़रीब छह महीने के सबसे निचले स्तर पर आ गया और 23,000 के स्तर से नीचे चला गया. मंगलवार को भी निफ़्टी 50 में गिरावट जारी है. कमज़ोर रुपया, महंगा कच्चा तेल और विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली से बाज़ार की धारणा पर दबाव बना हुआ है.

ब्रेंट क्रूड 106 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर

ब्रेंट क्रूड 106 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर है, जबकि अमेरिकी बाज़ार में बेंचमार्क 10-ईयर ट्रेजरी यील्ड 19 साल के नए उच्च स्तर पर पहुंच गई. ऐसे में वैश्विक बाजार का माहौल चुनौतीपूर्ण बना हुआ है.

18 सितंबर को समाप्त हुए सप्ताह में भारत

18 सितंबर को समाप्त हुए सप्ताह में भारत का विदेशी मुद्रा भंडार क़रीब दो साल में सबसे बड़ी साप्ताहिक गिरावट के साथ कम हुआ.

इस दौरान आरबीआई ने रुपये को सहारा देने

इस दौरान आरबीआई ने रुपये को सहारा देने के लिए डॉलर बेचे. रुपये पर एक बार फिर दबाव बढ़ा है, जिसकी प्रमुख वजह ऊंची तेल क़ीमतें और पूंजी का बाहर जाना है.

बीएसई सेंसेक्स सोमवार को 708 अंक यानी 0.97

बीएसई सेंसेक्स सोमवार को 708 अंक यानी 0.97 प्रतिशत तक गिरकर 72,064 पर आ गया, क्योंकि इंडेक्स के ज्यादातर शेयर लाल निशान में कारोबार कर रहे थे.

अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप डोनाल्ड ने ईरान के साथ

अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप डोनाल्ड ने ईरान के साथ सात दिन के युद्धविराम के प्रस्ताव को ख़ारिज कर दिया, जबकि तेल बाज़ार ने भी संकेत दिया कि ईंधन की आपूर्ति कम होती जा रही है. 1. तेल की क़ीमतों में तेज़ी देश - दुनिया की बड़ी ख़बरें जिन्होंने बटोरी सुर्खियां.

अमेरिका-ईरान संघर्ष के कारण पश्चिम एशिया से तेल

अमेरिका-ईरान संघर्ष के कारण पश्चिम एशिया से तेल की आपूर्ति बहाल नहीं हो पा रही है. आपूर्ति बाधित रहने के कारण तेल की क़ीमतों में बढ़ोतरी हो रही है. कच्चा तेल भारत के लिए बाज़ार का एक प्रमुख कारक है, क्योंकि देश अपनी कच्चे तेल की ज़रूरत का अधिकांश हिस्सा आयात करता है.

सामान्य तौर पर, तेल की क़ीमतों में लंबे

सामान्य तौर पर, तेल की क़ीमतों में लंबे समय तक बनी रहने वाली तेज़ी भारतीय शेयर बाज़ार के लिए नकारात्मक होती है. इससे आयात बिल बढ़ता है, रुपये पर दबाव पड़ सकता है, महंगाई और ब्याज दरों से जुड़े जोखिम बढ़ते हैं और ईंधन पर अधिक निर्भर इंडस्ट्री के मुनाफ़े पर दबाव पड़ता है.

महंगे कच्चे तेल का मतलब है बढ़ा हुआ

महंगे कच्चे तेल का मतलब है बढ़ा हुआ आयात बिल, जिससे रुपये पर दबाव बढ़ सकता है और महंगाई भी बढ़ सकती है. ऐसे में आरबीआई के रुख में सख़्ती का जोखिम बढ़ जाता है, जिसका असर मार्जिन और शेयरों के वैल्यूएशन पर पड़ सकता है.

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भारतीय शेयर बाज़ार में जारी गिरावट की चार बड़ी वजहें, कैसी होगी आगे की राह - BBC News हिंदी

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Source: BBC Hindi
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